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पथराव करने वाले या गोली चलाने वाले देशद्रोही - एक बार जरुर पढ़े

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जय हिन्द , भारतीय सेना को मेरा सलाम

न कोई सोच विचार और न कोई घोर अध्यन यह एक कड़वा सच है कि हम भारत के लोग आतंकवाद,नक्सलवाद, माओवादियों आदि को अलग अलग चश्मे से देखते हैं जो की भारतीय  नागरिकता  एवं भारतीय संविधान के लिए घातक है।  क्यूंकि भारतीय संविधान में किसी भी भेदभाव के लिए कोई स्थान नही है।

परन्तु इस शैतानी भेदभाव की क्रिया का असर  साफ साफ मालूम पड़ता  है कि हम भारतीय नागरिक होने के नाते आतंकवाद,नक्सलवाद, माओवादियों  के लिए कितने संवेदनशील हैं ताज़ा ताज़ा उदहारण बिहार के CRPF कोबरा बटालियन और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 10  CRPF जवानों को नक्सलियों ने  शहीद कर दिया, मुठभेड़ में कोबरा बटालियन के पांच जवान घायल हो गए। इस दर्दनाक घटना को लेकर न हम भारतीय नागरिकों मैं कोई हलचल है और न किसी मीडिया चैनल पर को चर्चा परन्तु हाँ हम कुछ मुठ्ठी भर पापीस्तान के बहकावे में आने वाले कश्मीरयों द्वारा हिंसा को लेकर सोशल मीडिया एवं मीडिया जगत में खूब ज़हरीली भाषा का युद्धवार चल रहा  हैं ।

मेरा प्रशन यह है के क्या भारतीय सेना पर केवल कश्मीरयों द्वारा पत्थर फेंके जाये तभी हम भारतीय सेना के हितों और उनकी रक्षा व सम्मान के बारे में बात करेंगें? नक्सलवाद, माओवादियों द्वारा भारतीय सेना और आम नागरिकों पर हो रहे अत्याचार पर आखिर हम चुप क्यों है ?

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क्या आपको मालूम है नक्सलवाद के विचारधारात्मक विचलन की सबसे बड़ी मार आँध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड और बिहार को झेलनी पड़ रही है। न्यूज़ जगत के  आंकड़ों के अनुसार देश भर में 2005 से लेकर 2016 तक नक्सली हमलों में 2860 भारतीय  नागरिक मारे गए, इन 11 वर्षों के काल में नक्सली हमलों में देश के 1805 भारतीय जवान शहीद हुए हैं।

1999 से 2016 तक, देश में 26  हज़ार से अधिक  नक्सली हमले हो चुके हैं,नक्सलियों ने इस दौरान 7 हज़ार से ज़्यादा आम लोगों और 2000 से ज्यादा सुरक्षाबलों के जवान शहीद हो गए।

जबकि दूसरी तरफ एक वर्ष में जम्मू-कश्मीर में उग्रवादीयो से जुड़ी हिंसा और पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में 108 आतंकियों व 47 सुरक्षा कर्मियों समेत 190 लोगों की जानें गई। ये आंकड़े बीते वर्ष 15 जनवरी से लेकर इस वर्ष 15 जनवरी 2016 के है।

इन आकड़ों के बाद मुझको पूरा सांख्यकीय व्यवरण देने की आवश्यकता नहीं है आप खुद हिसाब लगा लें कौन कितना ज्यादा घातक है। हालाँकि मेरे लिए हर प्रकार की हिंसा आतंकवाद की श्रणी में आती है अब कोई मेरी बात से सहमत हो यह तो जरूरी नहीं है।

हम लोग अपने को राष्ट्र भगत कहते हैं और भारतीय सेना की रक्षा एवं उनके सम्मान की बात करते है पर क्या किसी ने यह भी सोचा के हम केवल कश्मीर में भारतीय सेना के जवानों की शहादत को ही बड़ी शहादत क्यों मानते हैं? और कश्मीर की हिंसा को ही आतंकवाद क्यों मानते हैं ?

सीधी सीधी सी बात है ऐसा कर के हम भारतीय सेना के साथ भी बहुत बड़ा अन्याय करते हैं। क्यूंकि  हम लोगों ने अपनी आँखों पर धर्म का ऐसा चश्मा लगा रखा है जो हमारी आँखों से उतरता ही नही है जो की हमारे देश के लिए बड़ी ही दुभाग्य कि बात है।

अंत में एक बात अंकित करता हूँ कि भले ही कश्मीर में कट्टरपंथी अलगाववादी हिंसा करें या नक्सलवाद, माओवादियों आदि द्वारा हिंसा की जाये वो आतंकवाद की श्रणी में ही आयगी इस हमले में भले ही भारतीय सुरक्षा कर्मियों की शाहदत हो या आम लोगों की आखिर खून तो इन्सान का ही बहता है। और हिंसा करने वाला का खून शैतानी होता है भले ही वो किसी धर्म जात का हो।



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    Riyaz Abbas Abidi के द्वारा
    July 27, 2016

    बहुत बहुत बधाई डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर साहब


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