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VVIP इफ्तार पार्टी का सच

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रसूलुल्लाह स. ख़ुतबए शाबानिया में फ़रमाते हैं, पवित्र रमजान का महीना तुम्हारी ओर अपनी बरकत और रहमत के साथ आ रहा है। इसी ख़ुतबए शाबानिया में रसूले ख़ुदा स. फ़रमाते हैं- इस महीने में तुम्हे अल्लाह का मेहमान बनाया गया है, इसमें अल्लाह की तरफ़ से आपको दावत दी गई है
अल्लाह ने इस रमजान के मुबारक महीने में हम सब आम व खास को दावत दी है पर क्या हम अपने यहाँ भी आम व खास को दावत देते हैं ?
शायद आप लोगों को मेरा सवाल समझ में न आया हो पर मैं जरा विस्तार से बताने की चेष्टा करता हूँ जब हम रोज़ा रखते हैं तो हम रोज़ा अफ्तार पार्टी का आयोजन किया करते है यह बड़ी ख़ुशी की बात है पर क्या सही में यह रोज़ा अफ्तार पार्टी होती है या सिर्फ उन लोगों के लिए होती है जिन के पेट पहले से ही भरे होते है ?
पहले मैं घरो में छोटी छोटी इफ्तार पार्टी की बात करता हूँ अक्सर देखा गया है रमजान के महीने में नए- नए पकवान बनवाकर एक दुसरे के घर भेजते हैं मस्जिदों में भेजते हैं यह कृत्य बहुत अच्छा है पर किया कभी इस भेजने वाले ने यह सोचा के पडोस में या इस का कोई रिश्तेदार ऐसे पकवानों के खाने से वंचित है ? या कोई मुझ से नाराज़ है उसको को मनाना चाहिये ? जिस पर अत्याचार किया है उससे माफ़ी ? ठीक है रमजान का महीना बरकत और रहमत का है पर यह महीना बरकत वो रहमत का उसके लिए है जो अल्लाह राह में खर्च करे।
ऐसा नही है मैं कोई दुध का धुला हूँ और इसी लिए ही मैंने अपने मन बात लिखी है ताकि इस पवित्र रमजान में मैं सुधार कर लों।
पैग़म्बरे इस्लाम (स) फ़रमाते हैं कि जिसने भी तुमको वंचित किया है तुम उसको प्रदान करो, जिसने तुमसे संबन्ध तोड़ लिए हैं उनसे तुम संपर्क बनाओ, जिसने तुमपर अत्याचार किया है उसे अनदेखा कर दो। अगर तुमने ऐसा किया तो फिर अल्लाह तुम्हारे साथ होगा।
अब में बड़ी VIP इफ्तार पार्टी की ओर आता हूँ आज कल हमारे समाज में एक अजीब सा माहोल धर्म जाति एकता के नाम बनता जा रहा है धर्म जाति एकता के नाम पर बड़े बड़े खर्चे किये जा रहें है कुछ व्यापारी तो कुछ राजनेता तो कुछ अभिनेता तो कुछ संस्थाए एकता , ग़रीबी के नाम पर एक आयोजन करते है जिस में कुछ अहम बड़े बड़े VIP को बुलाया जाता है वो आते है कुछ बोलते हैं और खाते हैं और चले जाते हैं। मजे की बात यह रहती है जिन के लिए किया जा रहा है उनको भनक भी लगती हाय रे मेरा समाज।
ऐसा ही कुछ हमारे देश में इफ्तार पार्टी के नाम पर किया जा रहा है एक तरफ जहाँ ग़रीब के पास खाने के लिए खाना नही है पहनने को कपडा नही है वही इफ्तार पार्टी कर के मंत्रियो , राजनेताओ , व्यापारियो , अभिनेताओ को बुलाया जाता है और लाखो खर्च किये जाते है पर ग़रीब की भूक को सुनने वाला कोई नही है जो मस्जिदों , मदिरों , रेलवे स्टेशन आदि स्थानो पर भीक मांग कर गुज़ारा कर रहें हैं उन पर किसी की भी नज़र नही पड़ती आखिर क्यों ?
दरअसल यह VIP इफ्तार पार्टी न देश के लिए है न लोगों की एकता के लिए है न मुसलमानों के हितों के लिए यह तो बस एक मीडिया में आने और अपनी शोहरत पाने का एक घटिया तरीका है।
इस्लाम में इफ्तार कराने का पुण्य (सवाब) बहुत ज्यादा बताया है पर अमीरों या पेट भरो या बे रोज़े दारों के लिए कोई सवाब नही बताया है।
पवित्र रमजान महीने की बरकत वो रहमत बहुत ज्यादा है इस लिए यदि सही में इफ्तार पार्टी करना चाहते हैं और यह सब अल्लाह को राज़ी करने के लिए कर रहें हैं तो क्यों नही सब ग़रीबो , भिकारियो के लिए आम इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हो ?
जितना पैसा VIP इफ्तार पार्टी पर लगाया जाता है उस पैसे को क्यों नही ग़रीब बच्चो की शिक्षा पर लगते हो ? VIP इफ्तार पार्टी में केवल टोपी लगा कर या एक खजूर खा कर कोई भेद भाव नही मिटते हैं।
पैग़म्बरे इस्लाम(स) फ़रमाते हैं कि हमारे अनुयाई उस समय तक सुरक्षित रहेंगे जब तक वह अम्र बिलमारूफ और नही अनिलमुन्कर करते रहेंगे और भलाई तथा तक़वा अर्थात ईश्वरीय भय में एक दूसरे की सहायता करेंगे और जब उसे छोड़ देगें तो बरकत उन्हें छोड़कर चली जायेगी।
मैं तमाम मुसलमानों और सभी धर्मो के लोगों से अपील करता हूँ के इस पवित्र रमजान के महीने में अपनी एक दुसरे के प्रति जो नफरते है वो मिटा दें। राजनीति छोड़ सब मिलकर अमन वो शांति फैलाये। देश प्रदेश जिला नगर गाव से ग़रीबी भगाये।



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
June 30, 2016

जय श्री राम रिआज़ जी आपके इस सुन्दर लेख के लिए बधाई.ये मुसलमानों की गलती है जो राजनैतिक इफ्रार पार्टी का निमंत्रण मंजूर कर लेते सब राजनैतिक दल वोटो के खातिर ऐसा करते और रोज़ा की पवित्रता नष्ट करते .मुसलमानों को हर उस बात का विरोध करना चाइये जो देश के लिए गलत हो आज ततक मुसलमानों ने कश्मीर से पंडितो के निष्कर्षण की निंदा नहीं की.उनको सोचना चाइये की पहले उनका फ़र्ज़ देश के लिए है लेकिन टीवी में जिस तरह ज़हर उगला जाता उससे गलत सन्देश जाता है.मुसलमानों को अपने हित के लिए कट्थरपंथी नेताओ से दूर आधुनिक शिक्षा पर ध्यान देना चाइये.


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